Thursday, November 2, 2017

हम तो सुधरना ही नहीं चाहते



ajay gangrade itarsi, Ajay Gangrade Itarsi, Itarsi, Gangrade
Ajay Gangrade Itarsi MP
'डाक्‍टर साहब चैम्‍बर में है?' अपना विजिटिंग कार्ड  अटेन्‍डेन्‍ट को थमाते हुए उस एम.आर. ने पूछा।
'हां हैं, बैठिये अभी मिलावा देता हूं ' जवाब सुनकर एक निश्चिंतता का भाव चेहरे पर आया ही था कि अगले प्रश्‍न ने चौंका दिया-
 'हेलमेट लगा के आए हो?' सर ने उन्‍हीं को काॅल देने का कहा है जो एम.आर. हेलमेट लगा के आयेगा। '
शहर के सबसे प्रतिष्ठित हड्डी रोग विशेषज्ञ से सभी एम. आर. मिलना चाहते थे। उनका मधुर व्‍यवहार सबको भाता था।  समाज के लिये चिंता और समयाभाव के कारण कुछ विशेष न कर पाने का मलाल भी डाक्‍टर साहब की बातों में जब- तब झलकता था परंतु ये हेलमेट वाला माजरा क्‍या है, वह समझ नहीं पाया । अटेन्‍डेन्‍ट ने उसका कौतुहल मिटाया।
 'आप लोग सब जगह बाईक से आते-जाते हैं, कितनी रि‍स्‍क होती है।  अाप लोगों के लिये सोचकर ही सर ने यह नियम बना दिया है।'
सामान्‍यत: एमआर अपनी विजिट मोटरसाइकिल से ही करते थे।
कुछ दिन बाद अटेन्‍डेन्‍ट ने डॅाक्‍टर साहब को बताया कि जो एम आर हेलमेट पहनकर नहीं आता है वह पहले मिलकर गये एम. आर. का हेलमेट उधार मांग कर आपसे मिलने आ रहे हैं।
डॅाक्‍टर साहब सचेत हो गये, जांच होने लगी कि कहीं एक ही हेलमेट का बार-बार उपयोग तो नहीें हो रहा है।
कुछ दिन बाद पता चला कि आसपास की प्रत्‍येक मेडिकल शॅाप पर 2-4 हेलमेट रख्‍ाे हुए हैं और एम. आर. वहां से हेलमेट उठाकर डाक्‍टर साहब से  अपनी विजिट पूरी कर रहे हैं।
-- अजय गंगराड़े, इटारसी मोबाइल 8989414052



No comments:

Post a Comment