Wednesday, November 17, 2010

Laghukatha (SANTUSHTI) AJAY GANGRADE ITARSI

लघुकथा - संतुष्टि
बद्रीप्रसाद जी के चार बेटे थे. उन्होंने सभी को बराबर माना .  छोटे बड़े का भेदभाव नहीं रखा, कभी उपहार भी लाते  तो ध्यान रखते कि समानता का व्यव्हार हो परन्तु बेटे कमी निकालकर ताना देते रहते.
अपने अंतिम समय तक बद्रीप्रसाद जी ने सारी संपत्ति चार लाख रुपए में बेच दी और मृत्यु शैया पर चारों को बुलाकर एक-एक लाख रुपए देकर निश्चिंतता से आँखे मूँद ली.
तभी उनके कानो में सुनाई दिया पिताजी ने फिर बेईमानी कि है.
मुझे पुराने नोट दिये  और बड़े भैया को नए-नए.

अजय गंगराड़े, नेहरूगंज   इटारसी